जन स्वास्थ्य रक्षक स्वास्थ्य विभाग का अहम अंग है

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जन स्वास्थ्य रक्षक स्वास्थ्य विभाग का अहम अंग फिर क्यों इनके मौलिक अधिकारों का हनन”….? ……….#;. प्रांतीय जन स्वास्थ रक्षक कल्याण संगठन के जिला अध्यक्ष व प्रदेश उपाध्यक्ष जीवन लाल सेन ने बताया की..” जन स्वास्थ रक्षक योजना का प्रमुख उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराना था ताकि गांव स्तर पर प्राथमिक उपचार उपलब्ध हो व छोटी मोटी बीमारियों का इलाज ग्रामीण जनों को तत्काल प्राप्त हो सके जिसके लिए तत्कालीन सरकार ने करोड़ों रुपए खर्च कर इन्हें लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग मध्यप्रदेश सरकार द्वारा प्रशिक्षित कर राज्य स्तरीय परीक्षा लेकर सफल जन स्वास्थ रक्षक के लिए प्राथमिक उपचार हेतु पंजीकृत कर प्रतीक ग्रामों में नियुक्त किया गया”…. ……. … …. सरकार ने अनुबंधित किया कि जन स्वास्थ रक्षक शासन की राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों में अपनी सहभागिता देंगे एवं अन्य कोई दूसरा जॉब नहीं कर सकती साथ ही इनको अपने मौलिक अधिकारों से परिचित कराते हुए शपथ दिलाई की जन स्वास्थ्य रक्षक स्वास्थ्य विभाग का अहम अंग है व अग्रिम पंक्ति का सैनिक है इनको शासन द्वारा टूल किट और एक जन स्वास्थ रक्षक क्लीनिक लिखा हुआ बोर्ड भी दिया गया वेट मशीन फर्स्ट एड की सारी सामग्री भी प्रदान की गई क्लीनिक खोलने हेतु शासन से श्रीमान कलेक्टर महोदय की अनुशंसा पर ₹28000 बैंक ऋण भी दिया गया 2008 में शासन ने इन्हें ग्राम का डिपो होल्डर बनाने के लिए आदेश जारी किया फिर एक लंबे अंतराल के बाद सत्ता परिवर्तन होते ही जन स्वास्थ्य रक्षकों की नियुक्तियों के संबंधित लोक स्वास्थ्य संचनालय मध्य प्रदेश द्वारा 11 दिसंबर 2019 को समस्त मध्य प्रदेश के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों से उनकी सूची भेजने हेतु आदेश जारी हुआ ताकि इनकी नियुक्ति हो सके सभी जगह से सूचियां बिंदुवार जानकारी के साथ पहुंचा भी दी गई 8 सितंबर 2017 को सीएम हाउस में जन स्वास्थ रक्षक महापंचायत हुई जिसमें जन स्वास्थ्य संवर्धन बोर्ड का गठन किया गया आज तक उस पर कोई अमल नहीं हुआ 2003 में जन स्वास्थ्य रक्षक ₹2000 प्रोत्साहन राशि देने के आदेश जारी हुए आज तक कोई अमल नहीं हुआ राजनीतिक घटनाक्रम के चलते बीच में सत्ता परिवर्तन हो गया इनकी नियुक्तियां नहीं हो सकती आज भी जन स्वास्थ रक्षक इस वैश्विक महामारी में बिना सुरक्षा कवच के पूरी तत्परता के साथ ग्रामीण जनों का प्राथमिक उपचार कर गरीब एवं असहाय व्यक्तियों का इस भयंकर महामारी में 10 ₹50 में उपचार किया जन स्वास्थ्य रक्षकों द्वारा आज भी ग्रामीण जनों को टीकाकरण के लिए प्रोत्साहित करना और बीमारी से कैसे बचाव हो ऐसे तो सभी को समझाना दिवाल लेखन से लेकर सारे कार्य आज भी जन स्वास्थ्य रक्षकों के द्वारा किए जा रहे हैं आज भी जन स्वास्थ रक्षक प्रत्येक माननीय मंत्री महोदय विधायक कलेक्टर महोदय व जनप्रतिनिधियों के दरवाजे न्याय की गुहार लगा रहे पर शासन का इस वैश्विक कोरोना महामारी मैं भी इनके महत्व को नहीं समझ पा रही इसे हम एक दुर्भाग्य कह सकते हैं जन स्वास्थ्य रक्षक। मध्यप्रदेश में उनके मौलिक अधिकारों से वंचित रहने के कारण आहत एवं व्यथित है….।।। इंडिया न्यूज़ 24 बुंदेली प्रधान संपादक सागर से रामगोपाल कुशवाहा की स्पेशल रिपोर्ट

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